दाँडी माता के नाम से भी प्रसिद्ध, वे उग्र संरक्षण (खुंखर) और मातृसुलभ करुणा – दोनों का स्वरूप हैं। वे पीढ़ी-दर-पीढ़ी अपने भक्तों को साहस, आस्था और समृद्धि का आशीर्वाद प्रदान करती रही हैं।

सम्वत

११३९

खुंखर माताजी की पूजा सम्वत 1139 (बारहवीं शताब्दी) से होती आ रही है, जब उनका पहला मंदिर नागौर (राजस्थान) के तोषीणा में स्थापित किया गया। वे अनेक माहेश्वरी कुलों की कुलदेवी के रूप में पूजनीय हैं — जिनमें तोतला, तोषनीवाल, कोठारी, नागला, पटवारी, भरका, नागौरी, मिजाजी, मुँजी, मोदी, दामा, नेवार, लम्बू, दमड़ी, सिंघी, दास, डग्गा, झलरिया, जैनरिया और भकरोड़ शामिल हैं।

दाँडी माता

जहाँ इतिहास, भक्ति और चमत्कार एक होते हैं।

माँ का आज का संदेश

"तुम मेरी रक्षा की प्रार्थना करते हो, पर भय के साथ जीते हो;
रक्षा उन्हें नहीं मिलती जो छिपते हैं, रक्षा तो उन्हें मिलती है जो दृढ़ होकर खड़े रहते हैं।"

संग्रहालय

दिव्य साधन, जो माँ की उपस्थिति को आपके साथ बनाए रखें – जहाँ भी आप हों।

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माँ की अनुकम्पा हर जीवन में अलग स्वरूप में प्रकट होती है। अपने अनुभव हमें बताएँ, और हम उसे भक्तों के संग बाँटेंगे।

पूजा विधि एवं अनुष्ठान

हर उच्चारित मंत्र, हर समर्पित अर्पण और हर किया गया अनुष्ठान माँ से मिलन की ओर एक डग है। जानिए, खुंखर माता मंदिर की दिव्य पूजन परंपराएँ।

लेख​

भक्ति और ज्ञान की स्वरधारा — माँ से जुड़े चिंतन, कथाएँ और शिक्षाएँ।

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