दाँडी माता के नाम से भी प्रसिद्ध, वे उग्र संरक्षण (खुंखर) और मातृसुलभ करुणा – दोनों का स्वरूप हैं। वे पीढ़ी-दर-पीढ़ी अपने भक्तों को साहस, आस्था और समृद्धि का आशीर्वाद प्रदान करती रही हैं।
सम्वत
११३९
खुंखर माताजी की पूजा सम्वत 1139 (बारहवीं शताब्दी) से होती आ रही है, जब उनका पहला मंदिर नागौर(राजस्थान) केतोषीणा में स्थापित किया गया। वे अनेक माहेश्वरी कुलों की कुलदेवी के रूप में पूजनीय हैं — जिनमें तोतला, तोषनीवाल, कोठारी, नागला, पटवारी, भरका, नागौरी, मिजाजी, मुँजी, मोदी, दामा, नेवार, लम्बू, दमड़ी, सिंघी, दास, डग्गा, झलरिया, जैनरिया और भकरोड़ शामिल हैं।
"तुम मेरी रक्षा की प्रार्थना करते हो, पर भय के साथ जीते हो;
रक्षा उन्हें नहीं मिलती जो छिपते हैं, रक्षा तो उन्हें मिलती है जो दृढ़ होकर खड़े रहते हैं।"
संग्रहालय
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