माँ के बारे में

मेरे सुख दुःख की रखति हो खबर, मेरे सर पर साया तुम्हारा है,
मेरी नैया के खेवनहार तुम्ही, मेरा बेड़ा पार तुम्हई से है,
सब कुछ माँ तुम्हई से है ॥

समयरेखा

खुंखर माता मंदिर (राजस्थान) के इतिहास की यात्रा

१०वीं–११वीं शताब्दी

ग़ज़नवी साम्राज्य ने उत्तर-पश्चिम भारत (पंजाब और सिंध) पर आक्रमण किया। महमूद ग़ज़नी ने राजस्थान पर भी आक्रमण किया, लेकिन कभी स्थायी नियंत्रण स्थापित नहीं कर सका।

ऐतिहासिक काल में तोषीणा गाँव का स्थान

११वीं–१२वीं शताब्दी

पृथ्वीराज तृतीय, इस वंश के सबसे प्रसिद्ध शासक।

नागौर/डीडवाना/तोषीणा का भूभाग चौहान राजपूतों, अर्थात् शाकंभरी/अजमेर के चाहमान वंशजों द्वारा शासित था।

राजा अर्णोराज (शासनकाल 1135–1150) के समय सेठ तोसा शाह ने मंदिर का निर्माण कराया।

सेठ तोसा शाह की एआई द्वारा निर्मित छवि — जिसे उस काल के 1000 से अधिक चित्रों से प्रशिक्षित किया गया है। इसमें ऐतिहासिक तस्वीरों, उस युग में ज्ञात चेहरे की विशेषताओं, उस क्षेत्र की जानकारी तथा उस अवधि के उपग्रह चित्रों का भी उपयोग किया गया है।

संवत ११३९

१२वीं शताब्दी (लगभग १०८२–११३९ ईस्वी)

१२वीं–१३वीं शताब्दी

ग़ोरी आक्रमण (1192 ईस्वी – तराइन का युद्ध) ने दिल्ली में चौहान वर्चस्व का अंत कर दिया, लेकिन राजस्थान के राजपूतों ने अपने गढ़ मज़बूती से बनाए रखे।

१३वीं–१८वीं शताब्दी

(मध्यकालीन काल)

तैमूर के आक्रमण (१३९८ ईस्वी)

१४वीं–१६वीं शताब्दी

नागौर क्षेत्र पर तुर्क-अफ़ग़ान आक्रमण हुए, बाद में यह दिल्ली सल्तनत के अधीन आया और कुछ समय के लिए मेवाड़ के नियंत्रण में भी रहा।

१६वीं–१८वीं शताब्दी

यह क्षेत्र मुग़ल साम्राज्य में सम्मिलित हुआ, जिसके बाद इस पर मारवाड़ (जोधपुर राठौड़) का अधिकार विवादित रहा।

१९वीं शताब्दी

ब्रिटिश राज के दौरान यह क्षेत्र जोधपुर की रियासत (मारवाड़) का हिस्सा बन गया।

१९८१–१९९२

(आधुनिक पुनःखोज)

khunkhar Maa Temple Inaugration

१९९८ के उपरांत

(पुनःस्थापना)

माँ का स्वरूप

नाम का महत्व

चार भुजाएँ (चतुर्भुजा)

खड्ग (तलवारें)

कमलासन

लेख

मार्गदर्शन और प्रेरणा देने वाले शब्दों से, विश्वास की गहराइयों में प्रवेश करें।

अपना चमत्कार / अनुभव साझा करें

माँ की अनुकम्पा हर जीवन में अलग स्वरूप में प्रकट होती है। अपने अनुभव हमें बताएँ, और हम उसे भक्तों के संग बाँटेंगे।

पूजा विधि एवं अनुष्ठान

हर उच्चारित मंत्र, हर समर्पित अर्पण और हर किया गया अनुष्ठान माँ से मिलन की ओर एक डग है। जानिए, खुंखर माता मंदिर की दिव्य पूजन परंपराएँ।

लेख​

भक्ति और ज्ञान की स्वरधारा — माँ से जुड़े चिंतन, कथाएँ और शिक्षाएँ।

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